Iran Attack on Bahrain : अमेरिकी बेस की हालत गंभीर, मरम्मत में लगेगा कितना समय

Iran Attack on Bahrain: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के प्रमुख सैन्य अड्डे को ईरानी हमलों से भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना अब बेस की स्थिति का आकलन कर रही है और यह तय करने में जुटी है कि इसकी मरम्मत की जाए या नहीं।

बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के हमलों का निशाना नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन (NAS Bahrain) बना। यह बेस पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसेना के लिए बेहद अहम है और यहां अमेरिकी सेंट्रल कमांड तथा यूएस फिफ्थ फ्लीट से जुड़े प्रमुख ऑपरेशनल काम होते हैं। ईरानी हमलों के बाद बेस को काफी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है।

अमेरिकी अधिकारी काओ ने एक इंटरव्यू में हमले की गंभीरता को स्वीकार किया। इसके बाद अमेरिकी नौसेना के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस सैन्य अड्डे को दोबारा ऑपरेशनल स्थिति में लाने में कितना समय और संसाधन लगेगा।

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फिलहाल बेस पर नहीं लौटेंगे अमेरिकी सैनिक

अमेरिकी नौसेना के चीफ ऑफ नवल ऑपरेशंस एडमिरल डेरिल कॉडल ने 31 अगस्त को एक टाउन हॉल के दौरान कहा था कि अमेरिकी सैनिक फिलहाल बहरीन स्थित बेस पर वापस नहीं जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि सैनिक अपना निजी सामान लेने के लिए भी अभी बेस में प्रवेश नहीं कर सकते।

नौसेना अब इस बात का मूल्यांकन कर रही है कि बेस की मरम्मत करना बेहतर विकल्प होगा या भविष्य में सैन्य गतिविधियों के लिए कोई दूसरा इंतजाम किया जाएगा।

जॉर्डन के एयरबेस पर भी ईरान का हमला

ईरान के हमलों का असर केवल बहरीन तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले में अमेरिकी विमानों को भी नुकसान पहुंचा।

बताया गया कि एक A-10 थंडरबोल्ट विमान का एक पंख क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि करीब आठ F-15 लड़ाकू विमानों को भी हल्का नुकसान हुआ। इन विमानों को बाद में ठीक कर सेवा में वापस लाया गया। हमले के दौरान अमेरिकी सेना ने 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

तेल और शिपिंग रूट पर बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर पश्चिम एशिया के तेल और शिपिंग रूट पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी बलों ने अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों और शिपिंग हितों को निशाना बनाया है।

वहीं, अमेरिका की ओर से भी ईरान से जुड़े तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इससे क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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