Iran Sanctions: अमेरिका ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए उसके पांच प्रमुख सेक्टर पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान की अंतरराष्ट्रीय कमाई और दूसरे देशों के साथ होने वाले कारोबार को सीमित करना है। अमेरिका ने जिन क्षेत्रों को निशाना बनाया है, उनमें डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग शामिल हैं।
ईरान की कमाई पर अमेरिका का बड़ा वार
अमेरिका के नए प्रतिबंधों के तहत उन आर्थिक गतिविधियों को निशाना बनाया गया है, जिनके जरिए ईरान को विदेशों से पैसा और अन्य आर्थिक लाभ हासिल होता है। अमेरिकी प्रशासन का उद्देश्य ईरान की विदेशी मुद्रा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक पहुंच को कमजोर करना है।
इन पांच क्षेत्रों में ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है। खासतौर पर ऐसे कारोबार, जिनसे ईरान को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक फायदा मिलता है, अमेरिका की नजर में हैं।
इन 5 सेक्टर पर लगाया गया प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों को निशाना बनाया है।
- डिजिटल एसेट्स: क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाले लेनदेन।
- टेक्नोलॉजी: ईरान से जुड़ी तकनीकी वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार।
- सोना: सोने और इससे जुड़े व्यापार के जरिए होने वाली कमाई।
- एविएशन: विमानन क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियां और कारोबार।
- शिपिंग: समुद्री परिवहन और जहाजों के जरिए होने वाला व्यापार।
दूसरे देशों पर भी हो सकती है कार्रवाई
अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि कोई देश या कंपनी इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करती है जिससे उसे आर्थिक लाभ मिलता है, तो उस पर भी कार्रवाई की जा सकती है। इसे सेकेंडरी प्रतिबंध के तौर पर देखा जा रहा है।
ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनियों या देशों को अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने का जोखिम हो सकता है। हालांकि, अमेरिका ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन देशों या संस्थाओं पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
चीन, तुर्की और UAE पर नजर
ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में चीन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों का असर इन देशों के उन कारोबारियों और कंपनियों पर पड़ सकता है, जो ईरान के साथ इन पांच क्षेत्रों में व्यापार करते हैं।
अमेरिका के इस कदम से ईरान के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर दबाव बढ़ने की संभावना है। साथ ही, ईरान के साथ व्यापार करने वाले अन्य देशों के लिए भी अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम बढ़ गया है।