Bhupesh Baghel’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बहुचर्चित सेक्स CD कांड मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले में CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की ट्रायल प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश हाईकोर्ट के जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान जारी किया। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल विशेष अदालत में मामले की आगे की कार्यवाही तब तक नहीं होगी, जब तक हाईकोर्ट इस याचिका पर अगला आदेश जारी नहीं करता।
यह आदेश मामले की मेरिट पर अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि अंतरिम राहत के रूप में दिया गया है। अब इस प्रकरण की आगे की सुनवाई हाईकोर्ट में निर्धारित तिथि पर होगी।
CBI कोर्ट की कार्यवाही पर लगी रोक
मामले में भूपेश बघेल की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले पर विचार करते हुए CBI की विशेष अदालत में चल रही ट्रायल की आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखेंगे।
बहुचर्चित रहा है सेक्स CD कांड
सेक्स CD कांड छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है। इस मामले में कथित अश्लील CD के प्रसार और उससे जुड़े आरोपों को लेकर लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही है। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की गई और बाद में विशेष अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया।
समय-समय पर इस मामले में कई कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आते रहे हैं, जिसके चलते यह प्रकरण लगातार चर्चा में बना रहा।
अंतरिम राहत, अंतिम फैसला नहीं
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट द्वारा दिया गया यह आदेश केवल अंतरिम राहत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले का अंतिम निपटारा हो गया है। अदालत ने फिलहाल ट्रायल की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई है ताकि याचिका में उठाए गए कानूनी बिंदुओं पर विस्तार से सुनवाई की जा सके।
अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद ही लिया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य की राजनीति में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष और सत्तापक्ष की ओर से इस घटनाक्रम पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। हालांकि अदालत का आदेश पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और मामले की सुनवाई अभी जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालत के अंतिम फैसले से पहले किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।