Monsoon Session All Party Meeting: संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने टीएमसी (TMC) के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का विरोध करते हुए सांकेतिक वॉकआउट किया। करीब 15 मिनट बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए। विपक्ष का आरोप है कि जिन 20 बागी सांसदों के नए गुट को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मान्यता नहीं मिली है, उन्हें बैठक में बुलाना नियमों के खिलाफ है।
बैठक संसद भवन एनेक्सी में सुबह 11 बजे शुरू हुई। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, वाम दल, शिवसेना (यूबीटी), जेएमएम समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी दलों से मानसून सत्र को शांतिपूर्ण और सुचारु ढंग से चलाने में सहयोग की अपील की।
महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष का विरोध इस बात को लेकर है कि टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों के गुट नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मान्यता नहीं मिली है। साथ ही, इन सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे में सर्वदलीय बैठक में उन्हें किस आधार पर आमंत्रित किया गया। इसी मुद्दे के विरोध में विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार किया और बाद में वापस शामिल हो गए।
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बागी सांसद नई पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे
टीएमसी के बागी नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने बैठक में पहुंचकर कहा कि वह अब NCPI के नेता के रूप में शामिल हो रहे हैं। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ने इन सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति दी थी, हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह औपचारिक राजनीतिक मान्यता नहीं है।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
सरकार ने सहयोग की अपील की
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सभी दलों की जिम्मेदारी है कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चले। उन्होंने कहा कि हंगामे से किसी भी पक्ष को लाभ नहीं होता और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
NDA के संख्या बल पर भी चर्चा
टीएमसी और शिवसेना (उद्धव गुट) के कई सांसदों के अलग होने के बाद संसद में एनडीए का संख्या बल बढ़ा है। हालांकि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अभी भी एनडीए से दूर है। ऐसे में संसद के आगामी सत्र में संख्या बल और राजनीतिक समीकरण भी चर्चा का प्रमुख विषय बने रहेंगे।