Pakistan Exposed : पाकिस्तान का ‘डबल गेम’ बेनकाब’ नूर खान एयरबेस पर छिपाए ईरानी सैन्य विमान, अमेरिकी हमलों से बचाने की थी साजिश

Pakistan Exposed : इस्लामाबाद/वॉशिंगटन | 13 मई, 2026 एक तरफ पाकिस्तान दुनिया के सामने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए ‘शांतिदूत’ बनने का ढोंग कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ वह पर्दे के पीछे ईरान के सैन्य विमानों को पनाह दे रहा था। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CBS न्यूज के एक सनसनीखेज खुलासे ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने नूर खान एयरबेस पर ईरानी लड़ाकू और जासूसी विमानों को पार्क करने की अनुमति दी थी ताकि उन्हें अमेरिकी मिसाइलों और हवाई हमलों से बचाया जा सके।

सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल

हाल ही में सामने आईं हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर ईरान की वायुसेना के विमानों को साफ देखा जा सकता है। विशेष रूप से 25 अप्रैल 2026 की तस्वीरों में ईरानी एयरफोर्स का C-130 सैन्य विमान वहां खड़ा दिखाई दे रहा है।

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इस विमान की पहचान इसके खास रेगिस्तानी कैमोफ्लाज से हुई है, क्योंकि पाकिस्तानी वायुसेना के C-130 विमान आमतौर पर हल्के ग्रे रंग के होते हैं।

जासूसी विमान RC-130 भी था शामिल

खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान में पार्क किए गए विमानों में ईरान का RC-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस का वह मॉडल है जिसका इस्तेमाल जासूसी और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए किया जाता है। अमेरिका का मानना है कि ईरान ने अपने कीमती सैन्य संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए पाकिस्तान के एयरबेस को ‘सेफ जोन’ की तरह इस्तेमाल किया।

अमेरिका में मचा बवाल, पाकिस्तान के रोल पर सवाल

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वॉशिंगटन में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा:

“अगर यह रिपोर्ट सही है, तो पाकिस्तान की ‘मध्यस्थ’ के रूप में भूमिका का फिर से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। आप एक तरफ शांति वार्ता की बात नहीं कर सकते और दूसरी तरफ दुश्मन के जासूसी विमानों को अपने घर में नहीं छिपा सकते।”

पाकिस्तान की सफाई: ‘ये विमान कूटनीतिक थे’

घिरने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों को ‘भ्रामक’ बताया है। पाकिस्तान का तर्क है कि ये विमान युद्धविराम के दौरान केवल कूटनीतिक और लॉजिस्टिक सहायता के लिए वहां थे और इनका किसी सैन्य अभियान से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जासूसी विमानों का एक विदेशी एयरबेस पर खड़ा होना किसी भी तरह से सामान्य कूटनीति का हिस्सा नहीं हो सकता।

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