रामायण रहस्य: भगवान राम के बाण तो सिर्फ जरिया थे, रावण और उसकी सोने की लंका को ले डूबे थे ये 4 भयंकर श्राप

Lord Rama's arrows were just a means, these 4 terrible curses destroyed Ravana and his golden Lanka! Lord Rama's arrows were just a means, these 4 terrible curses destroyed Ravana and his golden Lanka!
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अहंकार और वासना की वजह से मिले ये 4 श्राप

रावण अपनी शक्तियों के मद में इतना अंधा हो चुका था कि उसने ऋषियों, देवताओं और महिलाओं का अपमान करना शुरू कर दिया था। वाल्मीकि रामायण और पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण को मिले ये चार श्राप उसकी लंका के दहन और उसके वंश के विनाश का मुख्य कारण बने:

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  • नंदी का श्राप: एक बार रावण भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत गया था। वहां द्वार पर पहरा दे रहे शिव के वाहन नंदी के स्वरूप को देखकर रावण जोर-जोर से हंसने लगा और उनका उपहास उड़ाया। अपमानित होकर नंदी ने रावण को श्राप दिया कि जिन वानरों के मुख का तू उपहास उड़ा रहा है, वही वानर एक दिन तेरी लंका के विनाश और तेरे सर्वनाश का कारण बनेंगे। बाद में हनुमान जी और सुग्रीव की वानर सेना ने इसी श्राप को सच कर दिखाया।
  • नलकुबेर का श्राप: स्वर्ग की अप्सरा रंभा को देखकर रावण मोहित हो गया और उसने जबरन उसका शील भंग करने का प्रयास किया। रंभा कुबेर के पुत्र नलकुबेर की होने वाली पत्नी थी। जब यह बात नलकुबेर को पता चली, तो उन्होंने अत्यंत क्रोधित होकर रावण को श्राप दिया कि यदि उसने भविष्य में किसी भी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उसे छूने या अपने साथ रखने का प्रयास किया, तो उसके मस्तक के सौ टुकड़े हो जाएंगे। इसी श्राप के डर से रावण ने माता सीता को अशोक वाटिका में रखा, पर उन्हें स्पर्श करने का साहस नहीं कर सका।
  • सती वेदवती का श्राप: भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही अत्यंत सुंदर और तपस्विनी वेदवती की कुटिया में जब रावण पहुंचा, तो उसने तपस्या भंग करने की कोशिश की और उनके बाल पकड़ लिए। अपने सतीत्व की रक्षा के लिए वेदवती ने तुरंत अपने बाल काट दिए और अग्नि में आत्मदाह कर लिया। चिता पर बैठने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि वह अगले जन्म में पुनः जन्म लेंगी और रावण के विनाश का मुख्य कारण बनेंगी। माना जाता है कि वेदवती ने ही माता सीता के रूप में जन्म लिया था।
  • राजा अनरण्य का श्राप: रघुवंश (जिस वंश में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ) के पूर्वज राजा अनरण्य ने जब रावण के अत्याचारों का विरोध किया, तो दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। युद्ध में पराजित होकर जब राजा अनरण्य मृत्युशैया पर थे, तब रावण उनका मजाक उड़ाने लगा। मरते हुए राजा अनरण्य ने रावण को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में एक ऐसा प्रतापी पुत्र जन्म लेगा, जो तेरा और तेरे पूरे राक्षस कुल का वध करेगा। आगे चलकर रघुवंश में ही प्रभु श्रीराम ने जन्म लेकर इस श्राप को पूर्ण किया।

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आम जनमानस पर इस प्रसंग का प्रभाव और सीख

रामायण का यह प्रसंग आज के आधुनिक समाज के लिए भी एक बड़ी सीख है। यह कहानी दर्शाती है कि कोई व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली, धनवान या बुद्धिमान क्यों न हो, यदि वह अपने पद और शक्ति के मद में चूर होकर दूसरों का, विशेषकर महिलाओं और संतों का अपमान करता है, तो उसका पतन निश्चित है। सोने की लंका का जलकर खाक होना इस बात का प्रतीक है कि अहंकार और अधर्म की नींव पर खड़ी की गई कितनी भी भव्य इमारत क्यों न हो, एक दिन उसे मिट्टी में मिलना ही होता है।

 

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