रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा ममता साहू को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद इस नियुक्ति को लेकर कानूनी बहस शुरू हो गई है। आयोग की निवृत्तमान अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि, उन्होंने ममता साहू को शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि उनकी नियुक्ति ऐसी होनी चाहिए, जिससे कार्यभार ग्रहण करने में किसी प्रकार की कानूनी बाधा न आए।
मीडिया से चर्चा करते हुए डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि 15 दिसंबर 2023 को जारी राज्य शासन के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस मामले में याचिका अभी भी लंबित है और अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावी है। उनका कहना है कि अंतिम निर्णय आने तक राज्य सरकार को महिला आयोग अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति का आदेश जारी नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को पहले न्यायालय में लंबित मामले का विधिवत निराकरण कराना चाहिए। उनके अनुसार, जब तक हाईकोर्ट में लंबित याचिका का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक उनका अध्यक्ष पद पर बने रहना न्यायोचित है। अन्यथा नई नियुक्ति को लेकर एक और कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है।
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ममता साहू को दी शुभकामनाएं
डॉ. नायक ने कहा कि उन्हें ममता साहू से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग को सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही कार्यभार ग्रहण कराने की कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी अड़चन न आए।
छह वर्षों के कार्यकाल का दिया ब्यौरा
डॉ. किरणमयी नायक ने अपने छह वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2020 से 10 जुलाई 2026 तक राज्य महिला आयोग में 6,463 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 6,349 मामलों का निराकरण किया गया। इस अवधि में प्रदेशभर में 416 जनसुनवाई आयोजित कर महिलाओं की शिकायतों का समाधान किया गया।
मानसिक प्रताड़ना के सबसे अधिक मामले
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मानसिक प्रताड़ना के 3,246 मामलों का निराकरण किया गया। इसके अलावा दहेज प्रताड़ना के 662, मारपीट के 584, संपत्ति विवाद के 390, विविध श्रेणी के 366, शारीरिक प्रताड़ना के 238, दैहिक शोषण के 211, कार्यस्थल पर प्रताड़ना के 141, आर्थिक प्रताड़ना के 92 तथा हत्या से जुड़े 80 मामलों का निपटारा किया गया।
इसके अतिरिक्त बलात्कार के 46, अपहरण के 42, यौन प्रताड़ना के 27, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के 19, सामाजिक बहिष्कार के 16, टोनही प्रताड़ना के 57, भरण-पोषण के 130, मानव तस्करी का 1 तथा बाल विवाह का 1 मामला भी आयोग के समक्ष आया।
डॉ. नायक ने बताया कि आयोग ने मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ के माध्यम से प्रदेश के 23 जिलों में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया। इसके अलावा साइबर अपराध, मानव तस्करी, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम-2013 तथा महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।