Supreme Court’ नई दिल्ली। CJP प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के उन सभी प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाए, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है और जिनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस और संबंधित एजेंसियों को प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और निष्पक्ष जांच की दिशा में अहम माना जा रहा है।
नाबालिग प्रदर्शनकारियों की रिहाई का निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, उन्हें अनावश्यक रूप से हिरासत में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने सभी राज्यों और दिल्ली प्रशासन को ऐसे नाबालिगों की पहचान कर तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए।
अदालत ने कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और जांच एजेंसियों को प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया क्लिप, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को संरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उनका उपयोग किया जा सके।
अदालत का मानना है कि निष्पक्ष जांच के लिए डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। अदालत ने संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और प्रत्येक मामले का मूल्यांकन तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
सरकारों और पुलिस को दिए गए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करें। नाबालिगों के मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाए और किसी भी कार्रवाई में पारदर्शिता बरती जाए।
साथ ही अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां सभी आवश्यक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि मामले की सुनवाई के दौरान किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो।