US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। गुरुवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के ग्रेटर टुंब (Greater Tunb) से लेकर खर्ग द्वीप (Kharg Island) तक कई सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, करीब 90 मिनट तक चले इस अभियान में मिसाइल लॉन्च साइट, तटीय रक्षा प्रणाली, एयर डिफेंस और सैन्य बैरकों को निशाना बनाया गया।
CENTCOM के मुताबिक, हमले भारतीय समयानुसार सुबह करीब 3:30 बजे शुरू हुए। इसके कुछ घंटे बाद अमेरिकी सेना ने एक और एयरस्ट्राइक कर ईरान के सैन्य ढांचे पर हमला किया। अमेरिकी सेना का दावा है कि कार्रवाई के दौरान ग्रेटर टुंब द्वीप पर क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्र, मिसाइल लॉन्चर (TEL), ड्रोन लॉन्च साइट और सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित 388वीं ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि खर्ग द्वीप की ओर बढ़ रहे एक तेल टैंकर को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन नहीं रुकने पर उसे मिसाइल से निष्क्रिय कर दिया गया।
CENTCOM द्वारा जारी वीडियो में USS Abraham Lincoln विमानवाहक पोत से F/A-18E Super Hornet लड़ाकू विमान उड़ान भरते दिखाई दिए। वहीं Arleigh Burke श्रेणी के युद्धपोतों से BGM-109 Tomahawk क्रूज़ मिसाइलें दागे जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।
वहीं दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। हालांकि इस हमले से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान के आसपास अमेरिकी वायुसेना की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इलाके में KC-135 और KC-46A एयर-टैंकर विमान, साथ ही E-3 AWACS निगरानी विमान सक्रिय देखे गए हैं। ये विमान लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन उपलब्ध कराने और हवाई निगरानी के लिए तैनात किए जाते हैं।
लगातार बढ़ते सैन्य हमलों के बीच US-Iran War ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आशंका जताई जा रही है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव नहीं रुका तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।