Vishwakarma Puja 2026 : नई दिल्ली। विश्वकर्मा पूजा हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को समर्पित प्रमुख पर्वों में से एक है। मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है। हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन कारखानों, वर्कशॉप, निर्माण स्थलों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में मशीनों, औजारों और तकनीकी उपकरणों की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में भी विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर देशभर में धार्मिक श्रद्धा के साथ मशीनों और औजारों की पूजा की जा रही है।
मशीनों और औजारों की पूजा क्यों होती है?
विश्वकर्मा पूजा का मुख्य उद्देश्य काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों के प्रति सम्मान प्रकट करना माना जाता है। कारीगर, इंजीनियर, मैकेनिक, मजदूर और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े लोग इस दिन अपने कार्यस्थल पर मशीनों और उपकरणों की सफाई करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए महल, अस्त्र-शस्त्र और विभिन्न दिव्य निर्माण किए थे। इसलिए निर्माण, शिल्प और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग उन्हें अपना आराध्य मानते हैं।
मशीनों पर स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है?
विश्वकर्मा पूजा के दौरान मशीनों, औजारों और वाहनों पर रोली या सिंदूर से स्वस्तिक बनाने की परंपरा है। हिंदू धर्म में स्वस्तिक को शुभता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के दौरान मशीन या औजार पर स्वस्तिक बनाकर भगवान विश्वकर्मा का स्मरण किया जाता है। मान्यता के अनुसार इससे कार्य में शुभता आती है और व्यक्ति अपने काम में सफलता की कामना करता है। हालांकि यह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है।
औजारों को कुछ समय के लिए इस्तेमाल नहीं करते
विश्वकर्मा पूजा के दिन कई जगहों पर मशीनों और औजारों को काम से रोककर उनकी पूजा की जाती है। पहले उपकरणों की अच्छी तरह सफाई की जाती है। इसके बाद उन्हें फूल, अक्षत, रोली, सिंदूर और माला अर्पित की जाती है।
कई कारखानों और वर्कशॉप में इस अवसर पर कर्मचारियों के लिए विशेष आयोजन भी किए जाते हैं। मशीनों की पूजा के साथ भगवान विश्वकर्मा से सुरक्षित और सफल कार्य की प्रार्थना की जाती है।