नई दिल्ली | शुक्रवार का दिन संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हो गया, जब केंद्र सरकार द्वारा लाया गया संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 लोकसभा में गिर गया। इस बिल का उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया को सुगम बनाना था। हालांकि, सदन में जरूरी बहुमत न मिल पाने के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका।
क्या हुआ सदन के भीतर?
शुक्रवार को लोकसभा में इस महत्वपूर्ण बिल पर हुई वोटिंग के दौरान सरकार को भारी झटका लगा। बिल को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से केवल 298 सदस्यों ने ही इसके समर्थन में वोट किया, जबकि 230 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक ‘विशेष बहुमत’ (352 वोट) न मिल पाने के कारण बिल खारिज हो गया।
बिल के गिरते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि सरकार अब इससे जुड़े अन्य दो संबंधित बिलों (परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल) को भी आगे नहीं बढ़ाएगी, क्योंकि ये सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
राहुल गांधी का भाषण: ‘दादी, बगीचा और जादूगर’
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए अपनी दादी और बचपन की यादों का सहारा लिया।
राहुल गांधी ने रूपक (Metaphor) का उपयोग करते हुए सदन में कहा, “यह बिल महिला आरक्षण के बारे में नहीं है, यह देश का चुनावी नक्शा बदलने की एक कोशिश है।” उन्होंने अपनी दादी (स्वर्गीय इंदिरा गांधी) का जिक्र करते हुए एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, “बचपन में मेरी दादी मुझे बगीचे में ले जाती थीं। वहां एक जादूगर आता था जो लोगों का ध्यान भटकाने में माहिर था। आज सरकार भी उसी जादूगर की तरह है, जो असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बिल ला रही है।” उन्होंने इसे ‘राष्ट्रविरोधी’ कदम तक करार दिया और कहा कि यह बिल दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम करने की एक साजिश है।
संसद के बाहर: भाजपा महिला सांसदों का प्रदर्शन
सदन के भीतर बिल के गिरते ही संसद परिसर के बाहर राजनीतिक पारा चढ़ गया। भाजपा की महिला सांसदों ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।