TRN एनर्जी प्लांट की मनमानी पर चला प्रशासन का डंडा, फ्लाई ऐश परिवहन में लापरवाही पर लगा भारी जुर्माना

रायगढ़ : जिले के घरघोड़ा क्षेत्र में संचालित टीआरएन (TRN) एनर्जी पावर प्लांट की लापरवाही अब कंपनी प्रबंधन की जेब पर भारी पड़ रही है। पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर फ्लाई ऐश (राख) का असुरक्षित परिवहन करने के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों और बढ़ते जन आक्रोश के बाद, पर्यावरण विभाग ने त्वरित जांच करते हुए प्लांट प्रबंधन पर 68,445 रुपये का आर्थिक जुर्माना ठोक दिया है।

यह कार्रवाई औद्योगिक इकाइयों के लिए एक कड़ी चेतावनी मानी जा रही है जो विकास के नाम पर पर्यावरण मानकों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।

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मुख्य बिंदु :

  • जुर्माने की राशि: ₹68,445 (पर्यावरण क्षति पूर्ति हेतु)।

  • कारण: फ्लाई ऐश का खुले वाहनों में असुरक्षित परिवहन और सड़कों पर राख फैलाना।

  • प्रभावित क्षेत्र: घरघोड़ा के आसपास के ग्रामीण इलाके और मुख्य मार्ग।

  • जांच एजेंसी: छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB), रायगढ़।

नियमों को ताक पर रखकर हो रहा था काम

जांच में पाया गया कि TRN एनर्जी प्लांट से निकलने वाली राख (Fly Ash) को बिना ढके और बिना उचित सुरक्षा मानकों के ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा था। परिवहन के दौरान यह राख उड़कर हवा में मिल रही थी और सड़कों पर गिर रही थी, जिससे:

  1. दृश्यता (Visibility) में कमी: सड़क पर उड़ती राख के कारण वाहन चालकों को परेशानी हो रही थी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था।

  2. स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: स्थानीय ग्रामीणों में श्वसन संबंधी बीमारियों (Asthma/Bronchitis) की शिकायतें बढ़ने लगी थीं।

  3. फसलों को नुकसान: सड़कों के किनारे स्थित खेतों की फसलों पर राख की परत जमने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा था।

जन आक्रोश के बाद जागा विभाग

घरघोड़ा क्षेत्र के निवासियों ने कई बार प्लांट प्रबंधन से शिकायत की थी, लेकिन कोई सुधार नहीं होने पर मामला पर्यावरण विभाग तक पहुँचा। विभाग की टीम ने मौके पर जाकर साक्ष्य जुटाए और परिवहन के दौरान बरती जा रही गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की।

“औद्योगिक इकाइयों को स्पष्ट निर्देश हैं कि फ्लाई ऐश का परिवहन पूरी तरह से ढके हुए वाहनों (Tarpulin/Capsules) में ही किया जाए। TRN प्लांट द्वारा इन नियमों का उल्लंघन पाया गया, जिसके आधार पर यह जुर्माना लगाया गया है। यदि लापरवाही जारी रही, तो प्लांट की बंदी तक की कार्रवाई की जा सकती है।” — पर्यावरण अधिकारी, रायगढ़

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