- बड़ा मुकाबला: उल्का गुप्ता ने ‘झांसी की रानी’ के लीड रोल के लिए आयोजित ऑडिशन में 300 लड़कियों को मात दी थी।
- खून में अभिनय: पिता गगन गुप्ता से घर पर ही थिएटर की बारीकियां सीखीं, जो खुद 15 साल की उम्र में बिहार से मुंबई आए थे।
- अनुशासन: एक्टिंग करियर को संवारने के लिए पिता के कड़े निर्देशों और ‘कठपुतली’ बनने के पीछे के राज का खुलासा किया।
Ulka Gupta Interview 2026 , मुंबई — मनोरंजन की दुनिया में पैर जमाना किसी ‘नॉकआउट’ टूर्नामेंट को जीतने जैसा है। अभिनेत्री उल्का गुप्ता ने हाल ही में अपने करियर के उस मोड़ का जिक्र किया, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। ‘झांसी की रानी’ के ऐतिहासिक रोल के लिए उन्होंने 300 लड़कियों के साथ मुकाबला किया और अपनी प्रतिभा के दम पर मैदान मार लिया। उल्का का मानना है कि उनकी यह सफलता उनके पिता गगन गुप्ता के मार्गदर्शन और घर पर मिली कड़ी ‘थिएटर ट्रेनिंग’ का नतीजा है।
मैदान पर ‘स्लेजिंग’ और संघर्ष: बिहार से मुंबई तक का सफर
उल्का ने बताया कि एक्टिंग उनके लिए कोई संयोग नहीं, बल्कि विरासत है। उनके पिता गगन गुप्ता ने अभिनय के सपने को पूरा करने के लिए महज 15 साल की उम्र में बिहार छोड़ दिया था।
- कोच और मेंटर: गगन गुप्ता ने अपने तीनों बच्चों को घर पर ही अभिनय की पाठशाला शुरू करवाई।
- कठपुतली का राज: उल्का के मुताबिक, वह पिता की ‘कठपुतली’ इसलिए बनती थीं क्योंकि उन्हें पता था कि उनके पिता का अनुभव उन्हें सही दिशा में ले जा रहा है।
- स्ट्राइक रेट: कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच लीड रोल हासिल करना उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
अक्सर स्टार किड्स को लेकर चर्चा होती है, लेकिन उल्का की कहानी एक मिडिल क्लास पिता के संघर्ष और उनकी मेहनत से उपजी सफलता की दास्तां है। उनके पिता ने प्रोफेशनल थिएटर की शिक्षा को घर के आंगन तक पहुंचाया, जिससे उल्का को कैमरे के सामने ‘लंबी पारी’ खेलने में मदद मिली।
“मेरे खून में अभिनय है क्योंकि मैं एक एक्टर के घर पैदा हुई हूं। मेरे पिता 15 साल की उम्र में बिहार से एक्टर बनने आए थे। उन्होंने हम तीनों भाई-बहनों को घर पर ही थिएटर की शिक्षा दी। मैं उनके निर्देशों का पालन करती थी क्योंकि वह मेरे सबसे बड़े गुरु हैं।”
— उल्का गुप्ता, अभिनेत्री