कराची। पाकिस्तान नौसेना को समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी मजबूती मिली है। चीन के सहयोग से निर्मित पहली हंगोर-क्लास पनडुब्बी कराची बंदरगाह पहुंच गई है। इस अत्याधुनिक सबमरीन के आगमन को पाकिस्तान अपनी नौसैनिक क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी के रूप में देख रहा है।
जानकारी के मुताबिक, यह पनडुब्बी चीन से रवाना होकर मलेशिया, इंडोनेशिया, सुंडा जलडमरूमध्य और श्रीलंका के समुद्री मार्गों से होते हुए पाकिस्तान पहुंची। कराची पहुंचने पर नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसका भव्य स्वागत किया और इसे आधुनिकीकरण कार्यक्रम का अहम हिस्सा बताया।
AIP तकनीक से लैस, लंबे समय तक रह सकती है पानी के भीतर
हंगोर-क्लास पनडुब्बी अत्याधुनिक एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से सुसज्जित है। इस तकनीक की मदद से यह पनडुब्बी लंबे समय तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर संचालन कर सकती है, जिससे दुश्मन की निगरानी से बचना आसान होता है और गुप्त मिशनों को अंजाम देने में मदद मिलती है।
आधुनिक हथियार और सेंसर से बढ़ी ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पनडुब्बी में आधुनिक हथियार प्रणालियां, उन्नत सेंसर और लंबी दूरी तक निगरानी करने की क्षमता मौजूद है। इससे पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक उपस्थिति और प्रभाव बढ़ेगा।
8 पनडुब्बियों का है बड़ा प्रोजेक्ट
पाकिस्तान और चीन के बीच हुए रक्षा सहयोग समझौते के तहत कुल आठ हंगोर-क्लास पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से कुछ का निर्माण चीन में किया जाएगा, जबकि बाकी पनडुब्बियां पाकिस्तान के कराची शिपयार्ड में तैयार होंगी।
पहली पनडुब्बी के आगमन के बाद पाकिस्तान नौसेना की ताकत में उल्लेखनीय इजाफा माना जा रहा है।
क्षेत्रीय संतुलन पर नजर
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस विकास से हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य संतुलन और नौसैनिक प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है। भारत सहित क्षेत्र के अन्य देश भी इस परियोजना पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।