I-PAC Raid Case: पश्चिम बंगाल के चर्चित I-PAC रेड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख Mamata Banerjee की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि जांच CBI को सौंपी जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी।
दरअसल, 8 जनवरी 2026 को कोलकाता स्थित राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान कथित तौर पर जांच में बाधा डालने का मामला सामने आया था। ED ने ममता बनर्जी और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने ED की याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले को CBI को ट्रांसफर किया जा सकता है।
ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर फैसला करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसी स्थिति नहीं चाहते, जिसमें सरकार बदलने के बाद मामले को राजनीतिक कारणों से दूसरी एजेंसी को सौंपे जाने का आरोप लगे।
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ममता बनर्जी की वकील ने क्या तर्क दिया?
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत में कहा कि अब राज्य में सरकार बदल चुकी है। ऐसे में सैंक्शन की मंजूरी और मामले को स्थानीय पुलिस को ट्रांसफर करने का अनुरोध राज्य सरकार की ओर से किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी दलील दी कि इस मामले में अब कुछ बाकी नहीं रह गया है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से टिप्पणी की गई कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद स्थिति बदल गई है और अदालत मामले को CBI को सौंपने के अनुरोध पर विचार कर सकती है।
ED ने क्या आरोप लगाए हैं?
ED का आरोप है कि I-PAC कार्यालय में छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी और राज्य के कुछ अधिकारियों ने जांच में हस्तक्षेप किया था। इसी आधार पर ED अधिकारियों ने मामले में FIR दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
अब सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में CBI जांच की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, अदालत ने अभी अंतिम रूप से CBI जांच का आदेश नहीं दिया है। मामले पर अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।