महिला नक्सली मांगो को NIA स्पेशल Court’ ने किया बरी, अभियोजन पक्ष नहीं साबित कर सका आरोप

Court’ बिलासपुर। महिला माओवादी मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी, निवासी बारनागुड़ा, नारायणपुर को बिलासपुर की एनआईए विशेष अदालत से राहत मिली है। पुलिस पर जानलेवा हमला, अवैध हथियार रखने और प्रतिबंधित माओवादी संगठन की गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों से जुड़े मामले में अदालत ने उसे बरी कर दिया है। विशेष अदालत के न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

पुलिस टीम पर हमले का था आरोप

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि मांगो नुरेटी माओवादी गतिविधियों में शामिल थी और एक मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर हमला करने वालों में उसकी भूमिका थी। इसके अलावा उस पर अवैध हथियार रखने सहित अन्य आरोप भी लगाए गए थे।

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अभियोजन ने अदालत के सामने विभिन्न साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से आरोपों को साबित करने का प्रयास किया। हालांकि अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अभियोजन की कहानी को आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।

मुठभेड़ के दौरान फायरिंग साबित नहीं हुई

अदालत के फैसले में यह महत्वपूर्ण बात सामने आई कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि मांगो नुरेटी मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग करने वालों में शामिल थी।

मामले में आरोपी की पहचान से जुड़े साक्ष्यों पर भी सवाल सामने आए। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और गवाहियों का परीक्षण करते हुए पाया कि पहचान से संबंधित साक्ष्य आरोपों को निर्णायक रूप से साबित करने की स्थिति में नहीं थे।

सुपुर्दगी और बरामदगी के साक्ष्यों में कमी

मामले में ओडिशा पुलिस से आरोपी की सुपुर्दगी, उसकी चोट और हथियार बरामदगी से संबंधित साक्ष्यों को भी अदालत ने जांचा। इन पहलुओं में सामने आई कमियों का भी मामले के मूल्यांकन में महत्व रहा।

अदालत ने माना कि आपराधिक मामले में अभियोजन पक्ष को आरोपों को संदेह से परे साबित करना होता है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर आरोपी को दोषी ठहराना संभव नहीं था।

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