CJP Leaders News: आशुतोष-सौरव की रिहाई में देरी का आरोप, धमकी मामले में अज्ञात लोगों पर FIR

CJP Leaders News: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत का मामला चर्चा में है। जमानत की सुनवाई कर रहे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। वहीं, CJP ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं की रिहाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। दोनों नेता 14 अक्टूबर से तिहाड़ जेल में बंद हैं। सोमवार को उन्हें दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में पेश किए जाने की संभावना जताई गई है।

मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने के बाद दर्ज हुई FIR

आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत पर सुनवाई के बीच स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कथित धमकी भरा संदेश मिलने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। हालांकि, अभी तक धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी है।

इस मामले पर CJP ने सवाल उठाए हैं। पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, रविवार को जमानत पर सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील दोपहर 12 बजे से इंतजार के बाद शाम करीब 5:30 बजे पहुंचे। पार्टी का आरोप है कि जमानत पर सुनवाई करने के बजाय मजिस्ट्रेट को मिले धमकी भरे संदेश पर चर्चा की गई।

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रत्ना सिंह ने सवाल किया कि धमकी भरे संदेश का दोनों नेताओं की जमानत से क्या संबंध है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने संदेश भेजने वाले की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई जवाब सामने नहीं आया है।

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चार जमानतदारों के दस्तावेज खारिज करने पर CJP ने उठाए सवाल

CJP ने आरोप लगाया है कि आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है। पार्टी के मुताबिक, जमानत के लिए पेश किए गए चार जमानतदारों के दस्तावेजों को स्पष्ट कारण बताए बिना खारिज कर दिया गया।

पार्टी ने बैंक की मुहर वाली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद को दोबारा मंजूरी के लिए पेश करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दोनों नेताओं को जेल में रखने के लिए जमानत प्रक्रिया में देरी की जा रही है। पार्टी ने कहा है कि वह अपने नेताओं की रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

हालांकि, जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर देरी किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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10 अक्टूबर: प्रदर्शन से पहले CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया

कॉकरोच जनता पार्टी ने SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था।

प्रदर्शन से पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही हिरासत में ले लिया गया था।

11 अक्टूबर को तीनों को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

13 अक्टूबर: जंतर-मंतर पहुंचने पर आशुतोष और सौरव हिरासत में

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद 13 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास तिरंगा लेकर वहां पहुंचे थे। उनके साथ कुछ अन्य प्रदर्शनकारी भी मौजूद थे।

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। तभी से दोनों नेताओं की रिहाई को लेकर CJP लगातार सवाल उठा रही है।

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16-17 अक्टूबर: अभिजीत दीपके को मिली जमानत

आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत के विरोध में CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली आयोजित की थी।

रैली से पहले पुलिस ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। इसके बाद 17 अक्टूबर को उन्हें 50 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत मिल गई और शनिवार शाम को रिहा कर दिया गया।

CJP के तिरंगा मार्च पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं तीन FIR

CJP की ओर से आयोजित तिरंगा मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कम से कम तीन FIR दर्ज की थीं। इनमें पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं समेत कई लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।

ये FIR कनॉट प्लेस और मंडी हाउस पुलिस थानों में दर्ज की गईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने, सड़क के बीच मार्च निकालने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं।

CJP ने पहले भी जंतर-मंतर पर किया था लंबा प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी ने इससे पहले NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से 25 जुलाई तक प्रदर्शन किया था। पार्टी के मुताबिक, यह प्रदर्शन 36 दिनों तक चला था। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे।

20 जुलाई को पार्टी ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश भी की थी। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया था।

फिलहाल, आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत का मामला सुर्खियों में है। CJP ने जहां उनकी रिहाई में देरी का आरोप लगाया है, वहीं मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने के मामले में पुलिस की जांच जारी है।

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