Bastar Naxal Operation : जगदलपुर। बस्तर में नक्सलियों की पकड़ कमजोर पड़ने के बाद अब सुरक्षा बलों ने उनके जमीन में छिपाए गए हथियार, विस्फोटक और नकदी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। “ऑपरेशन खजाना” नाम से चलाए जा रहे इस अभियान में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें इसरो के सैटेलाइट, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और बम निरोधक दस्तों के मेटल डिटेक्टर शामिल हैं।पिछले तीन महीनों में सुरक्षा बलों ने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाकर 8 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के हथियार, विस्फोटक और नकदी बरामद की है।
इसरो के RISAT-2B सैटेलाइट की मदद
जानकारी के अनुसार, जंगलों में छिपे नक्सली डंप का पता लगाने के लिए इसरो के ‘RISAT-2B’ सैटेलाइट की सहायता ली जा रही है। यह सैटेलाइट घने जंगलों में संदिग्ध खुदाई, नई बनी पगडंडियों और जमीन के तापमान में बदलाव जैसे संकेतों के जरिए संभावित ठिकानों की पहचान कर रहा है।इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से थर्मल स्कैनिंग भी की जा रही है, ताकि जमीन के नीचे छिपे विस्फोटकों और हथियारों का सटीक पता लगाया जा सके।
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जमीन के नीचे छिपाते थे हथियार और कैश
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, नक्सली लेवी से वसूली गई रकम और हथियारों को जमीन के नीचे विशेष सुरक्षा घेरे में छिपाकर रखते थे। सबसे ऊपर मिट्टी और कांटे बिछाए जाते थे, उसके नीचे आईईडी और सबसे नीचे वॉटरप्रूफ पैकिंग में नकदी व हथियार रखे जाते थे।इन गुप्त ठिकानों की जानकारी केवल शीर्ष नक्सली नेताओं के पास कोड वर्ड में होती थी।
सरेंडर नक्सली से मिली अहम जानकारी
हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले एक नक्सली लीडर के मोबाइल की जांच में 22 गुप्त लोकेशन का पता चला है। इन जानकारियों के आधार पर सुरक्षा बल लगातार जंगलों में अभियान चला रहे हैं।अधिकारियों का कहना है कि नक्सली इन्हीं संसाधनों के जरिए हथियार, कारतूस और राशन की खरीद करते थे तथा नए युवाओं को संगठन से जोड़ने की कोशिश करते थे।
“गड़े हुए नक्सलवाद” को खत्म करने की रणनीति
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि सुरक्षा बल अब केवल नक्सलियों की मौजूदगी खत्म करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके आर्थिक और हथियार नेटवर्क को भी जड़ से समाप्त करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि जब तक बस्तर की जमीन से आखिरी विस्फोटक और डेटोनेटर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी चुनौती
हालांकि बस्तर में नक्सल नेटवर्क काफी कमजोर हो चुका है, लेकिन जमीन में दबे विस्फोटक और हथियार अभी भी सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। ऐसे में “ऑपरेशन खजाना” को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान माना जा रहा है।