Bengal IPS Bushra Bano Controversial Video: पश्चिम बंगाल के खड़गपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनका तबादला कर दिया गया है। उन्हें राज्य सशस्त्र पुलिस में डिप्टी कमांडेंट के पद पर भेजा गया है। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
UPSC उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए दिया था भाषण
दरअसल, विवाद बुशरा बानो के एक वीडियो को लेकर शुरू हुआ। वीडियो में वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की रिहायशी कोचिंग अकादमी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े अपने अनुभव साझा करती नजर आईं। उन्होंने बताया कि UPSC की तैयारी के दौरान कोचिंग अकादमी से उन्हें किस तरह मदद मिली।
बुशरा बानो ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘अस्सलामुअलैकुम’ से की और भाषण के दौरान ‘इंशाअल्लाह’ तथा ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। वीडियो वायरल होने के बाद इसको लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया।
‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम्’ का जिक्र नहीं करने पर शिकायत
वीडियो को लेकर हिंदू लीगल फंड नाम की वेबसाइट की ओर से पश्चिम बंगाल के गृह सचिव से शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एक सेवारत पुलिस अधिकारी ने सार्वजनिक संबोधन में धार्मिक अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल किया, लेकिन ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय अभिवादन का इस्तेमाल नहीं किया।
शिकायत में अधिकारी के सार्वजनिक संचार में निष्पक्षता बनाए रखने और राष्ट्रीय अभिव्यक्तियों के इस्तेमाल की मांग की गई है। हालांकि, ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम्’ बोलना हर पुलिस भाषण में अनिवार्य है, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित सेवा नियमों का आधिकारिक आधार देखना जरूरी है।
बुशरा बानो का हुआ तबादला
विवादित वीडियो के सामने आने के बाद बुशरा बानो का तबादला कर दिया गया। उन्हें राज्य सशस्त्र पुलिस में डिप्टी कमांडेंट की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, पार्थ घोष को खड़गपुर का अतिरिक्त एसपी बनाया गया है।
इसके अलावा सुभेंदु मंडल को चंदननगर पुलिस आयुक्त कार्यालय में अतिरिक्त डीसी नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
Bengal IPS Bushra Bano Controversial Video को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। पूरे मामले में वीडियो, शिकायत और तबादले के पीछे आधिकारिक आदेश की सटीक वजह को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी अधिकारी की मंशा या नियमों के उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।