CG Mahadev Betting Case : महादेव सट्टा किंग सौरभ चंद्राकर की रायपुर कोर्ट में पेशी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम’ CBI मांग सकती है कस्टोडियल रिमांड

CG Mahadev Betting Case : रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब 6 हजार करोड़ रुपये के कथित सट्टा घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। आरोपी की पेशी को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) सौरभ चंद्राकर से विस्तृत पूछताछ करने के लिए अदालत से कस्टोडियल रिमांड की मांग कर सकती है। इस पेशी के बाद महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सौरभ चंद्राकर की पेशी से कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर की रायपुर में पेशी को लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट रहीं। कोर्ट परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। सुरक्षा व्यवस्था ऐसी रखी गई कि पेशी के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या अप्रिय घटना न हो।

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आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। इस घटनाक्रम पर मीडिया और आम लोगों की भी नजर बनी हुई है।

6 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले में मुख्य आरोपी

सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का प्रमुख प्रमोटर और इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध लेनदेन किए जाने का आरोप है।

करीब 6 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने छत्तीसगढ़ सहित देशभर में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी। मामले में पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े लोगों, वित्तीय लेनदेन और कथित हवाला कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं।

CBI मांग सकती है कस्टोडियल रिमांड

सौरभ चंद्राकर से पूछताछ को जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CBI उससे महादेव ऐप के संचालन, आर्थिक लेनदेन, नेटवर्क से जुड़े लोगों और कथित तौर पर प्राप्त रकम के इस्तेमाल को लेकर सवाल कर सकती है।

बताया जा रहा है कि विस्तृत पूछताछ के लिए जांच एजेंसी अदालत से कस्टोडियल रिमांड की मांग कर सकती है। हालांकि, रिमांड को लेकर अंतिम फैसला अदालत का होगा।

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