CG-RERA Action : रायपुर। छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े मामलों में छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने सख्त रुख अपनाया है। अपूर्ण एवं अपंजीकृत परियोजना से जुड़े मामले में प्राधिकरण ने प्रमोटर को आबंटी यानी मकान खरीदार को 6.87 लाख रुपये ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई को रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा और बिल्डरों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपूर्ण और अपंजीकृत परियोजना पर कार्रवाई
रियल एस्टेट क्षेत्र में किसी भी आवासीय परियोजना को लेकर खरीदारों की अपेक्षा रहती है कि उन्हें निर्धारित शर्तों के अनुसार समय पर मकान या फ्लैट का कब्जा मिले। परियोजना के अधूरे रहने या पंजीकरण से संबंधित नियमों का पालन नहीं होने पर खरीदारों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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इसी तरह के मामले में CG-RERA ने कार्रवाई करते हुए प्रमोटर को आबंटी के पक्ष में ब्याज की राशि चुकाने का निर्देश दिया है। प्राधिकरण का आदेश उन घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है, जो बिल्डर की ओर से परियोजना में देरी या अन्य अनियमितताओं के कारण परेशानियों का सामना करते हैं।
आबंटी को 6.87 लाख रुपये ब्याज देने का निर्देश
इस मामले में CG-RERA ने प्रमोटर को 6.87 लाख रुपये ब्याज के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है। यह राशि संबंधित आबंटी को दी जानी है। आदेश का उद्देश्य घर खरीदार के हितों की रक्षा करना और परियोजना से जुड़े दायित्वों के पालन को सुनिश्चित करना है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में परियोजना का नाम, प्रमोटर की पहचान, ब्याज की गणना की अवधि और भुगतान के लिए निर्धारित समयसीमा का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। इन तथ्यों की पुष्टि प्राधिकरण के मूल आदेश से की जानी चाहिए।
क्या है CG-RERA की भूमिका?
छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना और घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है। रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत लागू नियमों के अनुसार, संबंधित परियोजनाओं और प्रमोटरों को निर्धारित प्रावधानों का पालन करना होता है।
यदि परियोजना से जुड़े दायित्वों का पालन नहीं किया जाता या खरीदारों के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो पात्र मामलों में प्राधिकरण के समक्ष शिकायत की जा सकती है। प्राधिकरण तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर उचित आदेश जारी कर सकता है।