Chhattisgarh Pensioners : बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के हजारों पेंशनर्स के लिए न्याय की बड़ी खबर सामने आई है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य के बुजुर्ग पेंशनभोगियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सरकार को छठे और सातवें वेतनमान के बकाया एरियर का भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकार को यह प्रक्रिया 90 दिनों (3 महीने) के भीतर पूरी करनी होगी।
सीएमएचओ कार्यालय से लेकर हाई कोर्ट तक की लड़ाई
यह मामला लंबे समय से अधर में लटका हुआ था। पेंशनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों, विशेषकर पेंशनर्स समाज के माध्यम से इस बदहाली और आर्थिक हक को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही थी।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धाराओं के पेंच और राज्यों के बीच आपसी सहमति की कमी के कारण छत्तीसगढ़ के हजारों पेंशनर्स का एरियर अटका हुआ था।
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मुख्य मांग: छठे वेतनमान का 32 महीने का एरियर और सातवें वेतनमान का बकाया भुगतान।
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कोर्ट का रुख: हाई कोर्ट ने शासन को सख्त निर्देश दिया है कि वह मध्य प्रदेश सरकार के साथ समन्वय बैठाकर या अपने स्तर पर इस राशि का निराकरण करे।
कांग्रेस ने भी घेरा था स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था को
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर राजनीतिक पारा भी गर्म है। एक ओर जहाँ अस्पतालों की व्यवस्था पर प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय हितों की इस जीत ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
पेंशनर्स समाज में खुशी की लहर
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद पेंशनर्स एसोसिएशन ने हर्ष व्यक्त किया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि यह उन बुजुर्गों की जीत है जो अपने जीवन की जमा पूंजी और हक के लिए सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। यदि सरकार तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं करती है, तो संगठन ने दोबारा न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी दी है।