High Court’S Strictness : कॉन्स्टेबल प्रमोशन पर ब्रेक, अंतिम आदेश जारी करने पर रोक; 15 जून को अगली सुनवाई

High Court’S Strictness : बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में चल रही पुलिस कॉन्स्टेबल से प्रधान आरक्षक पदोन्नति प्रक्रिया पर अहम अंतरिम आदेश जारी करते हुए अंतिम प्रमोशन आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विभागीय प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की अंतिम पदोन्नति सूची या आदेश जारी नहीं किया जाएगा।

सिंगल बेंच में हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने यह राहत 72 से अधिक आरक्षकों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद प्रदान की है। अगली सुनवाई की तारीख 15 जून तय की गई है।

Chhattisgarh News : लापता लड़की की तलाश में बड़ा खुलासा , पुलिस ने मारा छापा, बंद कमरे से संदिग्ध हालत में मिले चार लोग

Advertisement

क्या है पूरा मामला?

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इन दिनों आरक्षकों को प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कोरबा जिले में पदस्थ 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है।

याचिकाकर्ताओं में लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल और विक्रम सिंह शांडिल्य सहित कई आरक्षक शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पदोन्नति प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे कई योग्य कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है।

किन्हें बनाया गया पक्षकार?

याचिका में राज्य शासन के साथ-साथ—

  • गृह सचिव
  • पुलिस महानिदेशक (DGP)
  • आईजी बिलासपुर रेंज
  • एसपी कोरबा

सहित कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

कोर्ट का क्या है आदेश?

हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा—

  • प्रमोशन की प्रक्रिया जारी रह सकती है
  • लेकिन अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं होगा
  • अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत बनाए रखी जाएगी

इस आदेश के बाद पूरे राज्य में चल रही प्रमोशन प्रक्रिया पर अस्थायी रूप से ब्रेक लग गया है।

पुलिस विभाग में हलचल

कोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। कई जिलों में प्रमोशन सूची जारी होने की तैयारी थी, लेकिन अब अंतिम आदेश पर रोक लगने से पूरी प्रक्रिया अटक गई है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि—

  • वरिष्ठता सूची में गड़बड़ी है
  • सेवा रिकॉर्ड का सही मूल्यांकन नहीं किया गया
  • कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार किया गया

इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी।

Spread the love
Advertisement