मुखबिर की सूचना पर दबिश, फिर शुरू हुआ ‘खूनी खेल’
आबकारी वृत्त मुंगेली की टीम को सटीक सूचना मिली थी कि लोहराकापा में बड़े पैमाने पर अवैध शराब का भंडारण और बिक्री की जा रही है। टीम जैसे ही मौके पर पहुंची और छापेमारी शुरू की, स्थानीय संदिग्धों और उनके समर्थकों ने टीम को घेर लिया। हमलावरों का इरादा साफ था—कार्रवाई को रोकना। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई। उन्होंने टीम के सदस्यों को धक्का देना शुरू किया और आरक्षक के साथ गाली-गलौज करते हुए उसकी वर्दी के बटन तोड़ दिए। आप उस पल के तनाव को महसूस कर सकते हैं; यह महज़ एक झड़प नहीं थी, बल्कि वर्दी पर सीधा प्रहार था।
जरहागांव थाने में मामला दर्ज, फरार आरोपियों की तलाश
हमले के बाद आबकारी विभाग के अधिकारियों ने तुरंत जरहागांव थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट और लोक सेवक पर हमला करने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गाँव में फिलहाल तनाव का माहौल है और पुलिस की कई टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं। शराब माफियाओं का यह दुस्साहस रणनीतिक रूप से पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो सरकारी कर्मचारियों का मनोबल गिर सकता है।
“हम डरने वाले नहीं हैं। अवैध शराब के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी। लोहराकापा की घटना में शामिल हर एक आरोपी को कानून के शिकंजे में लाया जाएगा। सरकारी वर्दी पर हाथ उठाना भारी पड़ेगा।”
— आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी, मुंगेली
इस हमले के बाद मुंगेली जिले में अवैध शराब ठिकानों पर पुलिस और आबकारी की संयुक्त छापेमारी तेज होने की उम्मीद है। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय इस मामले की निगरानी कर रहा है। आने वाले दिनों में लोहराकापा और आसपास के संवेदनशील गांवों में पुलिस का पहरा बढ़ाया जा सकता है। माफियाओं के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए भी रणनीतिक योजना बनाई जा रही है।