मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव— लाल सागर और मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों पर ईरान समर्थित गुटों के बढ़ते खतरों के बीच अमेरिकी सेना ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। अमेरिकी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए 118 जहाजों का रास्ता बदल दिया है। इसके साथ ही, समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके 5 संदिग्ध जहाजों और ड्रोनों को समुद्र में ही निष्क्रिय (नष्ट) कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद से वैश्विक व्यापारिक रूट पर तनाव चरम पर पहुंच गया है।

लाल सागर में सैन्य टकराव: क्यों उठाना पड़ा यह कदम
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ईरान की नौसेना और उसके सहयोगी संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की घेराबंदी करने की कोशिश तेज कर दी थी। खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वाणिज्यिक जहाजों पर आत्मघाती ड्रोनों और मिसाइलों से बड़े हमले की योजना थी। खतरे को देखते हुए, अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) ने तुरंत कमान संभाली। पिछले 48 घंटों में अदन की खाड़ी और लाल सागर से गुजरने वाले 118 कार्गो शिप्स को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया।
कार्रवाई के दौरान, अमेरिकी युद्धपोतों ने समुद्र में मंडराते 5 ऐसे जहाजों और मानवरहित हथियारों (UAVs) को इंटरसेप्ट किया, जो विस्फोटकों से लदे थे और वाणिज्यिक जहाजों की तरफ बढ़ रहे थे। अमेरिकी नौसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इन्हें समुद्र के बीच ही उड़ा दिया।
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वैश्विक व्यापार और भारत पर इसका असर
इस सैन्य कार्रवाई के कारण स्वेज नहर के रास्ते होने वाले व्यापार पर सीधा असर पड़ा है। रूट बदलने से जहाजों को अब अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे भारत आने वाले कच्चे तेल और यूरोपीय देशों को जाने वाले रेडीमेड गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामानों की खेप में 12 से 15 दिनों की देरी होने की आशंका है। शिपिंग कंपनियों ने पहले ही समुद्री माल ढुलाई (ओशियन फ्रेट) की दरों में बढ़ोतरी के संकेत दे दिए हैं, जिससे आने वाले दिनों में आयातित सामान महंगे हो सकते हैं।