Pitru Paksha 2026 : नई दिल्ली। सनातन धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। आमतौर पर यह अवधि 16 दिनों की होती है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। पितृ पक्ष को लेकर कई तरह की मान्यताएं भी प्रचलित हैं। इन्हीं में एक सवाल यह है कि इस दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून काटने चाहिए या नहीं।
पितृ पक्ष में बाल कटवाने को लेकर क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष को सादगी और संयम का समय माना जाता है। इसलिए कई परिवारों में इस दौरान बाल कटवाने से परहेज किया जाता है। विशेष रूप से जिस व्यक्ति के घर में श्राद्ध कर्म हो रहा हो, उसके लिए कुछ नियमों का पालन करने की परंपरा है।
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हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन परंपराओं में अंतर देखने को मिलता है। इसलिए इसे सभी लोगों के लिए एक समान धार्मिक नियम नहीं माना जाता।
दाढ़ी और मूंछ कटवाने को लेकर भी है परंपरा
पितृ पक्ष के दौरान दाढ़ी और मूंछ बनवाने को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। कई लोग श्राद्ध की अवधि में दाढ़ी-मूंछ नहीं कटवाते और साधारण जीवनशैली अपनाते हैं। इसका उद्देश्य धार्मिक कर्मों के दौरान संयम और श्रद्धा बनाए रखना माना जाता है।
वहीं, कुछ परिवारों में सामान्य रूप से दाढ़ी बनवाने की अनुमति होती है। इसलिए व्यक्ति को अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
नाखून काटने को लेकर क्या कहा जाता है?
पितृ पक्ष में नाखून काटने से भी कई लोग परहेज करते हैं। विशेष रूप से श्राद्ध करने वाले व्यक्ति के लिए संयम और शुद्धता से जुड़े कई नियम बताए जाते हैं। हालांकि, नाखून काटने को लेकर भी अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।
धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध कर्म के दौरान सात्विक भोजन, संयम और श्रद्धा को महत्वपूर्ण माना गया है। तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म पूरी श्रद्धा के साथ करने की परंपरा है। इन नियमों का पालन परिवार की परंपरा और संबंधित विद्वान या पुरोहित की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।