Sai Cabinet Meeting : किसानों के लिए खुशखबरी , धान नीलामी के ऐतिहासिक प्रस्ताव पर साय कैबिनेट लगा सकती है मुहर

Sai Cabinet Meeting , रायपुर — छत्तीसगढ़ की राजनीति और विकास के लिहाज से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में कैबिनेट की अहम बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा बस्तर क्षेत्र का कायाकल्प और किसानों से जुड़े अहम फैसले हैं। सबसे ज्यादा चर्चा बस्तर 2.0 प्रोजेक्ट को लेकर है, जिसे नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिखने के तौर पर देखा जा रहा है।

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बस्तर 2.0: गोलियों की गूँज के बाद अब तरक्की की बारी

हाल के महीनों में सुरक्षा बलों की सफलताओं के बाद बस्तर को लगभग नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है। अब सरकार का पूरा ध्यान बस्तर 2.0 पर है। यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़कों का जाल नहीं है, बल्कि यह बस्तर को स्टार्टअप, पर्यटन और आधुनिक कृषि का हब बनाने की एक महात्वाकांक्षी योजना है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, दंतेवाड़ा में नया मेडिकल कॉलेज और सुदूर इलाकों में ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण शामिल है।

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सरकार का लक्ष्य 2029 तक बस्तर के परिवारों की आय को दोगुना करना है। आज की बैठक में इस विजन डॉक्यूमेंट के क्रियान्वयन के लिए बजटीय आवंटन और नीतिगत ढांचों को अंतिम रूप दिया जा सकता है। आप महसूस कर सकते हैं कि बस्तर की हवाएं अब डर से नहीं, बल्कि उम्मीदों से भरी हुई हैं।

किसानों के लिए खुशखबरी: धान नीलामी पर फैसला

बैठक में मंत्रिमंडलीय उप समिति की उस सिफारिश पर भी मुहर लगने के आसार हैं, जिसमें सरप्लस धान की नीलामी करने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ ने इस सीजन में रिकॉर्ड धान खरीदी की है, और अब भंडारण क्षमता को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त धान की नीलामी एक तार्किक कदम है। इससे न केवल सरकारी खजाने में राजस्व आएगा, बल्कि अगले सीजन के लिए नई तैयारी भी शुरू हो सकेगी।

“बस्तर अब अशांति का नहीं, बल्कि प्रगति का पर्याय बनेगा। हमारा संकल्प है कि विकास की किरण हर उस गांव तक पहुंचे जहाँ कभी नक्सली साया था।”
— मुख्यमंत्री सचिवालय के करीबी सूत्र

इस बैठक के निर्णय शाम तक आधिकारिक तौर पर साझा किए जाएंगे। यह स्पष्ट है कि साय सरकार 2026 के इस दौर में ‘विकास’ को अपना सबसे बड़ा चुनावी और प्रशासनिक हथियार बना चुकी है। बस्तर 2.0 की सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल साबित हो सकती है।

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