US Iran Peace Deal : अमेरिका ने हटा दी ईरान की समुद्री नाकेबंदी, इजराइल को शांति प्रक्रिया का सम्मान करने की नसीहत

US lifts maritime blockade on Iran; advises Israel to respect the peace process. US lifts maritime blockade on Iran; advises Israel to respect the peace process.
US lifts maritime blockade on Iran; advises Israel to respect the peace process.

US Iran Peace Deal :  अमेरिका ने हटा दी ईरान की समुद्री नाकेबंदी—वॉशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते (MoU) के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी और हवाई हमलों ने ट्रंप प्रशासन की नई शांति पहल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे शब्दों में ‘असलियत समझने’ की नसीहत दी है।

US lifts maritime blockade on Iran; advises Israel to respect the peace process.
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समझौते के बाद भी थमा नहीं युद्ध

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हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौते का उद्देश्य लेबनान समेत सभी मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से युद्ध रोकना था। हालांकि, जमीनी हकीकत अलग है। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपने कब्जे वाले इलाकों का नया नक्शा जारी किया है और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायली सेना अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार अनिश्चितकाल तक लेबनान में तैनात रहेगी।

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गुरुवार को लेबनान में हुए इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत की खबर है। इन हमलों ने उस शांति प्रक्रिया को एक बड़े संकट में डाल दिया है, जिसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी उम्मीदें लगाए बैठे थे।

निवासियों पर असर और भविष्य की राह

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लेबनान के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिक इस अनिश्चितता के बीच पिस रहे हैं। जहां एक तरफ राजनयिक स्तर पर ‘सीजफायर’ की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ हवाई हमलों के सायरन और सैन्य गश्त ने लोगों की सामान्य जिंदगी को ठप कर दिया है।

स्विस शहर में होने वाली अमेरिका-ईरान की अगली उच्च-स्तरीय वार्ता भी फिलहाल अनिश्चितकालीन देरी की भेंट चढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इजरायल लेबनान से अपनी सेना पीछे नहीं हटाता है, तो ट्रंप का यह ‘ईरान समझौता’ शुरुआती दौर में ही विफल हो सकता है। फिलहाल, वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच के कूटनीतिक रिश्ते अब तक के सबसे निचले स्तर पर देखे जा रहे हैं।

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