तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर वार्ता के बीच मंगलवार को एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया। अमेरिकी सेना ने Strait of Hormuz के पास कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही ईरानी बोट्स को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की। इसके साथ ही बंदर अब्बास पोर्ट के समीप स्थित एक सरफेस टू एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि यह हमला आत्मरक्षा के तहत किया गया। सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने बताया कि अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।
अमेरिकी सेना का आरोप है कि होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती थी। हालांकि हॉकिन्स ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका सीजफायर वार्ता के दौरान संयम बरत रहा है और क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव से बचना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सैन्य कार्रवाई से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता की गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ सकती है, लेकिन फिलहाल बातचीत पूरी तरह टूटने के संकेत नहीं हैं। कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
1. ओबामा जैसी डील नहीं करेंगे ट्रम्प
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि वे ईरान के साथ पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama के कार्यकाल जैसी परमाणु डील नहीं करेंगे। ट्रम्प ने साफ कहा कि “या तो अच्छा समझौता होगा या फिर कोई समझौता नहीं होगा।”
2. दोहा वार्ता में होर्मुज और यूरेनियम सबसे अहम मुद्दे
ईरान के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल की कतर यात्रा के दौरान होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का मुद्दा सबसे अहम बना हुआ है। इसके अलावा ईरान की विदेशों में फ्रीज संपत्तियों को जारी करने पर भी चर्चा चल रही है।
3. समझौते पर नहीं हो सके हस्ताक्षर
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर अब तक हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं। इससे पहले कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दोनों देश सीजफायर बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने पर सहमत हो सकते हैं।
4. सुप्रीम लीडर की मंजूरी जरूरी
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि देश में कोई भी बड़ा फैसला सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा। इससे साफ संकेत मिला है कि वार्ता का अंतिम निर्णय ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के हाथ में ही रहेगा।
5. हिजबुल्लाह को फिर मिला ईरान का समर्थन
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने लेबनान और Hezbollah के समर्थन में बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ईरान, इजराइल के खिलाफ लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ खड़ा है।