डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका, $1.8 बिलियन के ‘एंटी-वेपनाइजेशन फंड’ पर कोर्ट ने बढ़ाई रोक

Court extends stay on $1.8 billion 'anti-weaponization fund' Court extends stay on $1.8 billion 'anti-weaponization fund'
Court extends stay on $1.8 billion 'anti-weaponization fund'

डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका—वॉशिंगटन. अमेरिका के एक संघीय न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के समर्थन वाले **1.8 अरब डॉलर (लगभग 1.776 अरब डॉलर) के ‘एंटी वेपनाइजेशन’ फंड** पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की जिला अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने ट्रंप-वेंस प्रशासन को सख्त निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर लिखित शपथ-पत्र दाखिल कर यह सुनिश्चित करें कि इस विवादास्पद फंड को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

Court extends stay on $1.8 billion 'anti-weaponization fund'
Court extends stay on $1.8 billion ‘anti-weaponization fund’

पुराना आदेश खत्म होने से पहले अदालत का कड़ा रुख

अमेरिकी जिला अदालत की **जज लियोनी ब्रिंकेमा** ने इस फंड के संचालन और गठन को रोकने का शुरुआती आदेश जारी किया। इससे पहले अदालत ने मई के आखिरी हफ्ते में इस योजना पर एक अस्थायी रोक लगाई थी, जिसकी मियाद शुक्रवार को समाप्त हो रही थी। अदालत ने पाया कि सरकार की तरफ से मौखिक बयानों के अलावा कोई ऐसा ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया जो यह साबित करे कि इस फंड को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ट्रंप प्रशासन ने टैक्स रिटर्न लीक होने के एक पुराने मामले में आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) के साथ हुए समझौते के तहत इस भारी-भरकम फंड को बनाने की घोषणा की थी। आलोचकों और विपक्षी दलों का आरोप है कि ट्रंप इस फंड का इस्तेमाल अपने राजनीतिक सहयोगियों और 6 जनवरी के कैपिटल हिल उपद्रवियों को फायदा पहुंचाने के लिए एक ‘स्लश फंड’ (गुप्त कोष) के रूप में करना चाहते थे।

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अदालत में तीखी बहस और सरकारी दलीलें खारिज

कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने इससे पहले कांग्रेस को सूचित किया था कि सरकार चौतरफा राजनीतिक दबाव के कारण इस योजना को आगे नहीं बढ़ा रही है। हालांकि, अदालत में सरकारी वकील एंड्रयू ब्लॉक इस बात का जवाब नहीं दे सके कि जब योजना बंद कर दी गई है, तो इसे स्थापित करने वाले आधिकारिक आदेश को निरस्त क्यों नहीं किया गया। इसी का संज्ञान लेते हुए अदालत ने प्रशासन से ‘पेनल्टी ऑफ परजुरी’ (झूठी गवाही के दंड के दायरे में) के तहत लिखित हलफनामा मांगा है।

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क्या है एंटी वेपनाइजेशन फंड और आगे क्या होगा?

प्रशासन का दावा था कि यह फंड उन लोगों को मुआवजा देने के लिए है जो पिछली डेमोक्रेटिक सरकारों की कथित ‘लॉफेयर’ (कानूनी उत्पीड़न) का शिकार हुए हैं। इस फंड की निगरानी पांच कमिश्नरों की समिति को करनी थी, जिनकी नियुक्ति और बर्खास्तगी का पूरा अधिकार राष्ट्रपति के पास सुरक्षित था।

गठबंधन संस्था **’डेमोक्रेसी फॉरवर्ड’** और पूर्व संघीय अभियोजकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि टैक्सपेयर्स के पैसों का इस तरह का इस्तेमाल वित्तीय नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। अदालत के इस आदेश के बाद अब जब तक सरकार लिखित में यह नहीं देती कि फंड पूरी तरह खत्म हो चुका है, तब तक अमेरिकी ट्रेजरी से ₹1 भी इस मद में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।

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