PM Modi’ नई दिल्ली। देशभर में ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर आपातकाल (इमरजेंसी) की वर्षगांठ को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने 25 जून 1975 को लागू की गई आपातकाल की अवधि को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए उस दौर को याद किया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा दौर था, जब संविधान की मूल भावना और नागरिकों के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया गया। उन्होंने कहा कि देशवासियों को उस समय के संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को याद रखना चाहिए।
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आपातकाल को लोकतंत्र पर लगाया गया सबसे बड़ा आघात बताते हुए कहा कि उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी और नागरिक अधिकारों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए इतिहास की उन घटनाओं से सीख लेना आवश्यक है।
भाजपा और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों द्वारा कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों और आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संविधान की गरिमा बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ नेताओं ने आपातकाल को ऐतिहासिक भूल बताया, जबकि कुछ ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का दौर पूरे दिन जारी रहा।
गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो करीब 21 महीने तक प्रभावी रहा। इस दौरान राजनीतिक गतिविधियों, मीडिया और नागरिक स्वतंत्रताओं पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए थे। भारतीय राजनीति में यह अवधि आज भी व्यापक बहस और चर्चा का विषय बनी हुई है।